नई दिल्ली – जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के ठीक दो सप्ताह बाद, भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए एक नई सैन्य कार्रवाई शुरू की है, जिसे “ऑपरेशन सिंदूर” नाम दिया गया है। “सिंदूर” शब्द हिंदू महिलाओं द्वारा विवाह के प्रतीक के रूप में पहने जाने वाले लाल रंग के चूर्ण को दर्शाता है। इस ऑपरेशन का नाम उन विधवाओं के सम्मान में रखा गया है, जिन्होंने पहलगाम हमले में अपने पति खो दिए थे। यह नामकरण उनके बलिदान को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से किया गया,यह ऑपरेशन भारतीय सेना और वायुसेना का एक साझा प्रयास था, जोकी न केवल आतंक के खिलाफ जवाब था बल्कि यह देश की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के लिए उठाया गया मजबूत कदम भी था।
22 अप्रैल 2025 को, जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित पहलगाम के पास बाईसारन घाटी में पांच आतंकवादियों ने पर्यटकों पर हमला किया था । हमलावरों ने सैन्य वर्दी पहन रखी थी, और वे AK-47 और M4 कार्बाइन जैसे हथियारों से लैस थे। इस हमले में 26 भारतीय नागरिकों की मृत्यु हो गई थी , इसके अलावा, 20 से अधिक लोग घायल हुए।हमलावरों ने विशेष रूप से गैर-मुस्लिम पर्यटकों को निशाना बनाया। आतंक वादियों ने पुरुषों से धर्म पूछा और कलमा पढ़ने को कहा, और जो नहीं पढ़ पाए उन्हें मार दिया गया। एक स्थानीय मुस्लिम पोनी ऑपरेटर, सैयद आदिल हुसैन शाह, ने हमलावरों से लड़ने की कोशिश की और उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे भी मारे गए।
भारत सरकार ने इस हमले के पीछे पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद का हाथ बताया। यह हमला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला माना गया।
ऑपरेशन सिंदूर: एक सुनियोजित जवाब
सरकार ने हमले के तुरंत बाद उच्च स्तरीय बैठकों का सिलसिला शुरू किया और जवाबी कार्रवाई के लिए योजना बनाई गई। इसके बाद 7 मई की तड़के तड़के लगभग 1:05 से 1:30 बजे के बीच 23 मिनट , भारतीय वायुसेना और सेना ने संयुक्त रूप से ये ऑपरेशन किया
ऑपरेशन के मुख्य बिंदु
ऑपरेशन में राफेल और सुखोई-30MKI जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल हुआ।
वायुसेना ने SCALP क्रूज़ मिसाइलें और AASM हैमर बम का उपयोग करते हुए सटीक हमले किए।
ऑपरेशन की अवधि करीब 23 मिनट रही और इसे अंधेरे में अंजाम दिया गया, ताकि सरप्राइज़ फैक्टर बना रहे।
हमलों में पाकिस्तान के बहावलपुर, मुरिदके, मुज़फ़्फराबाद, सियालकोट और कोटली जैसे स्थानों को टारगेट किया गया क्यूंकी इन सभी जगहों पर आतंकियों के ट्रेनिंग और लॉन्चिंग पैड माने जाते हैं। तथा इन हमलों में 70 से अधिक आतंकवादी मारे गए।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और विवाद
पाकिस्तान ने भारतीय हमलों की निंदा करते हुए इसे “सीमा पार आक्रामकता” कहा। पाकिस्तान की सेना ने दावा किया कि इन हमलों में 31 नागरिक मारे गए और 46 घायल हुए हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने एक आपातकालीन कैबिनेट बैठक के बाद बयान जारी किया और कहा कि “यह सीधी जंग की घोषणा है और पाकिस्तान इसका जवाब देगा।”
सीमा पर तनाव और गोलीबारी
ऑपरेशन सिंदूर के बाद से लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पर स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई है। कई स्थानों पर गोलीबारी और तोपों से फायरिंग हुई है, जिसमें दोनों तरफ के नागरिक हताहत हुए हैं। भारतीय गाँवों में बंकरों में रहने की व्यवस्था की गई है और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
नारी शक्ति की भूमिका: कर्नल सोफिया कुरैशी
इस ऑपरेशन की आधिकारिक जानकारी देने वाली पहली अधिकारी थीं कर्नल सोफिया कुरैशी, जो भारतीय सेना की सिग्नल कोर से हैं।
वे भारतीय सेना में अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास की अगुवाई करने वाली पहली महिला अधिकारी भी रही हैं।
उनकी संयमित और प्रभावशाली प्रेस कॉन्फ्रेंस ने देशभर में चर्चा बटोरी और यह साबित किया कि भारत की सैन्य शक्ति में महिलाओं की भूमिका कितनी अहम होती जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद दुनिया भर से भीप्रतिक्रियाएं आईं
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की।
अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और चीन ने भी कूटनीतिक समाधान निकालने का सुझाव दिया।
कई देशों ने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार को स्वीकार किया, लेकिन युद्ध से बचने की सलाह दी।
सियासत और सुरक्षा पर असर
भारत की घरेलू राजनीति में भी इस ऑपरेशन का प्रभाव दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “न्याय का दिन” कहा।
विपक्ष ने सवाल उठाए कि आखिर कैसे इतनी बड़ी आतंकी घटना हो गई, लेकिन सेना की कार्रवाई को समर्थन भी मिला।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह ऑपरेशन 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक से भी बड़ा और सटीक था, और इसका असर आने वाले समय में भारत-पाक संबंधों पर गहरा पड़ेगा।
ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरतेगा।
लेकिन यह भी सच है कि दोनों देश परमाणु हथियारों से लैस हैं और एक भी गलती विनाशकारी हो सकती है।
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